Vyavhar Sudhar aur Parmarth

20.00

व्यवहार-सुधार
और परमार्थ —भगवान् की प्राप्तिमें क्या-क्या बाधाएँ हैं एवं वे किस प्रकार
सुगमतासे शीघ्र दूर की जायँ, इन बातोंका विवेचन इन प्रवचनोंमें है। इनमेंसे कुछ
प्रवचन स्वामी श्रीरामसुखदासजी तथा सेठजीके अन्तरंग सत्संगियोंके साथ
प्रश्नोत्तर रूपमें भी हैं। इन प्रवचनोंकी गृहस्थ भाई-बहनोंके लिये बड़ी
उपादेयता है।

Language

Hindi

Writer

Shri Jayadayal Ji Goyendka

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व्यवहार-सुधार
और परमार्थ —भगवान् की प्राप्तिमें क्या-क्या बाधाएँ हैं एवं वे किस प्रकार
सुगमतासे शीघ्र दूर की जायँ, इन बातोंका विवेचन इन प्रवचनोंमें है। इनमेंसे कुछ
प्रवचन स्वामी श्रीरामसुखदासजी तथा सेठजीके अन्तरंग सत्संगियोंके साथ
प्रश्नोत्तर रूपमें भी हैं। इन प्रवचनोंकी गृहस्थ भाई-बहनोंके लिये बड़ी
उपादेयता है।

Additional information

Language

Hindi

Writer

Shri Jayadayal Ji Goyendka