Vrata Parichaya (Hindi)

70.00

भारतमें व्रतोंका सर्वव्यापी प्रचार है। व्रतोंके प्रभाव से
मनुष्योंकी आत्मा शुद्ध होती है और संकल्प शक्ति बढ़ती है। प्रस्तुत पुस्तकमें
प्रत्येक मासमें पडऩे वाले व्रतोंके विस्तृत परिचय के सा उन्हें सही ढंग से
सम्पादित करने की विधि दी गयी है। इसके अतिरिक्त इसमें परिशिष्ट   प्रकरणके अन्तर्गत अधिमासव्रत,
संक्रान्तिव्रत, अयनव्रत, पक्षव्रत, वारव्रत, प्रायश्चित्त व्रत तथा अन्तमें वट
सावित्री, मंगलागौरी, संकष्ट चतुर्थी, ऋषिपंचमी, शिव रात्रि आदि विभिन्न व्रतों
की सुन्दर कथाएँ दी गयी हैं।

Language

Hindi

Writer

Gita Press Gorakhpur

Out of stock

भारतमें व्रतोंका सर्वव्यापी प्रचार है। व्रतोंके प्रभाव से
मनुष्योंकी आत्मा शुद्ध होती है और संकल्प शक्ति बढ़ती है। प्रस्तुत पुस्तकमें
प्रत्येक मासमें पडऩे वाले व्रतोंके विस्तृत परिचय के सा उन्हें सही ढंग से
सम्पादित करने की विधि दी गयी है। इसके अतिरिक्त इसमें परिशिष्ट   प्रकरणके अन्तर्गत अधिमासव्रत,
संक्रान्तिव्रत, अयनव्रत, पक्षव्रत, वारव्रत, प्रायश्चित्त व्रत तथा अन्तमें वट
सावित्री, मंगलागौरी, संकष्ट चतुर्थी, ऋषिपंचमी, शिव रात्रि आदि विभिन्न व्रतों
की सुन्दर कथाएँ दी गयी हैं।

Additional information

Language

Hindi

Writer

Gita Press Gorakhpur