विरह-पदावली पुस्तकाकार— इस पुस्तकमें श्रीसूरदासजीके द्वारा
विरचित गोपी-विरह-सम्बन्धी ३२५ पदोंका संग्रह है। इसमें अक्रूरजीके साथ
श्रीकृष्णके मथुरागमनके समय यशोदा एवं गोपियोंकी विरह-दशाका बड़ा ही मर्मस्पर्शी
चित्रण किया गया है।
Additional information
| Language | Hindi |
|---|---|
| Writer | Shri Soordas Ji |





