Sukh Shantipurvak Jineki Kala (Bangla)

10.00

सुख-शान्तिका मार्ग पुस्तकाकार—मनुष्य जबतक दूसरे व्यक्ति, वस्तु,
परिस्थिति, स्थानमें सुख और शान्तिकी तलाश करनेका प्रयास करता है तबतक दैन्य,
निराशा और विषाद ही उसके हाथ लगता है। वास्तविक सुख-शान्ति प्रभुकी भक्ति तथा
प्राप्तिमें ही है। इस पुस्तकमें भक्ति और उसकी प्राप्तिके विभिन्न आयामोंकी
विस्तृत चर्चा की गयी है।

Language

Bangla

Writer

Gita Press Gorakhpur

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SKU: 2087 Category:

सुख-शान्तिका मार्ग पुस्तकाकार—मनुष्य जबतक दूसरे व्यक्ति, वस्तु,
परिस्थिति, स्थानमें सुख और शान्तिकी तलाश करनेका प्रयास करता है तबतक दैन्य,
निराशा और विषाद ही उसके हाथ लगता है। वास्तविक सुख-शान्ति प्रभुकी भक्ति तथा
प्राप्तिमें ही है। इस पुस्तकमें भक्ति और उसकी प्राप्तिके विभिन्न आयामोंकी
विस्तृत चर्चा की गयी है।

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Gita Press Gorakhpur