Sharanagati (Nepali)

6.00

सच्चेहृदयसे भगवच्छरणा-गतिकी स्वीकृतिहो जाने पर चिन्ता, भय, शोक
आदिदोषोंका अपने-आप उपशमन हो जाता है—इसदिव्य भावको दृढ़ कराने वाला ब्रह्मलीन
श्रद्धेयस्वामी श्रीरामसुखदासजी महाराज कृत एक सुन्दर विवेचन।

Language

Nepali

Writer

Swami Ramsukhdas Ji

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सच्चेहृदयसे भगवच्छरणा-गतिकी स्वीकृतिहो जाने पर चिन्ता, भय, शोक
आदिदोषोंका अपने-आप उपशमन हो जाता है—इसदिव्य भावको दृढ़ कराने वाला ब्रह्मलीन
श्रद्धेयस्वामी श्रीरामसुखदासजी महाराज कृत एक सुन्दर विवेचन।

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Nepali

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Swami Ramsukhdas Ji