Sankshipta Yoga Vashishthank (Hindi)

220.00

संक्षिप्त योगवासिष्ठ ग्रन्थाकार—इसमें जगत् की असत्ता और
परमात्मसत्ताका विभिन्न दृष्टान्तोंके माध्यमसे प्रतिपादन है। पुरुषार्थ एवं
तत्त्व-ज्ञानके निरूपणके साथ-साथ इसमें शास्त्रोक्त सदाचार, त्याग-वैराग्ययुक्त
सत्कर्म और आदर्श व्यवहार आदिपर भी सूक्ष्म विवेचन है।

Language

Hindi

Writer

Gita Press Gorakhpur

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संक्षिप्त योगवासिष्ठ ग्रन्थाकार—इसमें जगत् की असत्ता और
परमात्मसत्ताका विभिन्न दृष्टान्तोंके माध्यमसे प्रतिपादन है। पुरुषार्थ एवं
तत्त्व-ज्ञानके निरूपणके साथ-साथ इसमें शास्त्रोक्त सदाचार, त्याग-वैराग्ययुक्त
सत्कर्म और आदर्श व्यवहार आदिपर भी सूक्ष्म विवेचन है।

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Gita Press Gorakhpur