Parlok punarjanam ki satya ghatnayan (Telugu)

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भारतीय
संस्कृति और हिन्दूधर्ममें पुनर्जन्मका सिद्धान्त निॢववादरूपमें स्वीकार किया
गया है। जीव अपने कर्मानुसार समय-समयपर विभिन्न योनियोंमें जन्मलेता है और
सुख-दु:खका फल भोगता है। इस पुस्तकमें पुनर्जन्मके सिद्धान्त को पुष्ट  करने वाली २४ सत्यघटनाओं का कथानक के रूपमें
सुन्दर चित्रण किया गया है।

Language

Telugu

Writer

Gita Press Gorakhpur

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SKU: 1879 Category:

भारतीय
संस्कृति और हिन्दूधर्ममें पुनर्जन्मका सिद्धान्त निॢववादरूपमें स्वीकार किया
गया है। जीव अपने कर्मानुसार समय-समयपर विभिन्न योनियोंमें जन्मलेता है और
सुख-दु:खका फल भोगता है। इस पुस्तकमें पुनर्जन्मके सिद्धान्त को पुष्ट  करने वाली २४ सत्यघटनाओं का कथानक के रूपमें
सुन्दर चित्रण किया गया है।

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Telugu

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Gita Press Gorakhpur