Parlok Aur Punarjanmank (Hindi)

270.00

मनुष्य मात्रको पतनकारी आसुरी सम्पदाके दोषोंसे सदा दूर रहने तथा
परमविशुद्ध उज्ज्वल चरित्रहो कर सर्वदा सत्कर्म करते रहने की शुभ प्रेरणाके साथ
इसमें परलोक तथा पुनर्जन्मके रहस्यों और सिद्धान्तों पर विस्तृत प्रकाश डाला गया
है। आत्म-कल्याण कामी पुरुषों तथा साधक मात्रके लिये इसका अध्ययन-अनुशीलन अति
उपयोगी है।

Language

Hindi

Writer

Gita Press Gorakhpur

Out of stock

मनुष्य मात्रको पतनकारी आसुरी सम्पदाके दोषोंसे सदा दूर रहने तथा
परमविशुद्ध उज्ज्वल चरित्रहो कर सर्वदा सत्कर्म करते रहने की शुभ प्रेरणाके साथ
इसमें परलोक तथा पुनर्जन्मके रहस्यों और सिद्धान्तों पर विस्तृत प्रकाश डाला गया
है। आत्म-कल्याण कामी पुरुषों तथा साधक मात्रके लिये इसका अध्ययन-अनुशीलन अति
उपयोगी है।

Additional information

Language

Hindi

Writer

Gita Press Gorakhpur