Navagraha (Hindi)

25.00

भारतमें
नव ग्रह-उपासनाका इतिहास अत्यन्त पुराना है। प्रत्येक हिन्दू अपने त्रितापोंके
शमन एवं भौतिक उन्नतिके लिये समय-समय पर नवग्रहोंकी उपासना करता है। इस
पुस्तकमें शास्त्रोंके आधार पर नवग्रहोंके उद्भव-विकास, ध्यान और परिचयके साथ
उनकी उपासनाके मन्त्र दिये गये हैं। प्रत्येक ग्रह-परिचयके साथ उस ग्रहका
बहुरंगा आकर्षक चित्र दिया गया है।

Language

Hindi

Writer

Gita Press Gorakhpur

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SKU: 1018 Category:

भारतमें
नव ग्रह-उपासनाका इतिहास अत्यन्त पुराना है। प्रत्येक हिन्दू अपने त्रितापोंके
शमन एवं भौतिक उन्नतिके लिये समय-समय पर नवग्रहोंकी उपासना करता है। इस
पुस्तकमें शास्त्रोंके आधार पर नवग्रहोंके उद्भव-विकास, ध्यान और परिचयके साथ
उनकी उपासनाके मन्त्र दिये गये हैं। प्रत्येक ग्रह-परिचयके साथ उस ग्रहका
बहुरंगा आकर्षक चित्र दिया गया है।

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Gita Press Gorakhpur