माण्डूक्योपनिषद्
पुस्तकाकार—अथर्ववेदीय ब्राह्मïणके अन्तर्गत वॢणत इस उपनिषद्में केवल बारह
मन्त्र हैं। कलेवरकी दृष्टिïसे छोटी होनेपर भी भगवान् गौणपादाचार्यने इसपर
कारिकाएँ लिखकर इसे अद्वैतवादकी आधारशिला बना दिया है।
Additional information
| Language | Hindi |
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| Writer | Gita Press Gorakhpur |





