Kamb Ramayan Sunderkandamu (Tamil)

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रामायण ग्रन्थाकार—त्रेतायुगमें महॢष वाल्मीकिके
श्रीमुखसे साक्षात् वेदोंका ही श्रीमद्रामायणरूपमें प्राकट्य हुआ था, ऐसी आस्तिक
जगत्की मान्यता है। अत: श्रीमद्रामायणको वेदतुल्य प्रतिष्ठ ा प्राप्त है।
धराधामका आदिकाव्य होनेके कारण इसमें भगवान्के लोकपावन चरित्रकी सर्वप्रथम
वाङ्मयी परिक्रमा है। इसके एक-एक श्लोकमें भगवान्के दिव्य गुण, सत्य, सौहार्द,
दया, क्षमा, मृदुता, धीरता, गम्भीरता, ज्ञान, पराक्रम, प्रजा-रंजकता, गुरुभक्ति,
मैत्री, करुणा, शरणागत-वत्सलता-जैसे अनन्त पुष्पोंकी दिव्य सुगन्ध है।

Language

Tamil

Writer

Maharshi Valmiki

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SKU: 1890 Category:

रामायण ग्रन्थाकार—त्रेतायुगमें महॢष वाल्मीकिके
श्रीमुखसे साक्षात् वेदोंका ही श्रीमद्रामायणरूपमें प्राकट्य हुआ था, ऐसी आस्तिक
जगत्की मान्यता है। अत: श्रीमद्रामायणको वेदतुल्य प्रतिष्ठ ा प्राप्त है।
धराधामका आदिकाव्य होनेके कारण इसमें भगवान्के लोकपावन चरित्रकी सर्वप्रथम
वाङ्मयी परिक्रमा है। इसके एक-एक श्लोकमें भगवान्के दिव्य गुण, सत्य, सौहार्द,
दया, क्षमा, मृदुता, धीरता, गम्भीरता, ज्ञान, पराक्रम, प्रजा-रंजकता, गुरुभक्ति,
मैत्री, करुणा, शरणागत-वत्सलता-जैसे अनन्त पुष्पोंकी दिव्य सुगन्ध है।

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Tamil

Writer

Maharshi Valmiki