Jivchchhradhapadhati (Hindi)
₹100.00
भारतीय
सोलह संस्कारोंमें अन्तिम मरणोत्तर संस्कार श्राद्धकर्मकी विशेष महत्ता है। इसके
बिनाजीवकी सद् गति नहीं होती। यद्यपि यह संस्कार पुत्रके द्वारा सम्पादित होता
है, किन्तु आजके अनास्थाके वातावरणमें पले हुए कुछ पुत्र-पौत्र अपने माता-पिताके
मरणोत्तर कर्मको सही ढंगसे सम्पादित नहीं करते हैं। जो पुत्रवान् नहीं हैं, उनकी तो बातही अलग है। प्रस्तुत
पुस्तकमें जीवित श्राद्धकी शास्त्रीय व्यवस्था दी गयी है, जिसके माध्यमसे
व्यक्ति अपने जीवित रहते ही मरणोत्तर क्रिया का सही सम्पादन करके कर्म-बन्धनसे
मुक्त हो सके।
| Language | Hindi |
|---|---|
| Writer | Gita Press Gorakhpur |
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भारतीय
सोलह संस्कारोंमें अन्तिम मरणोत्तर संस्कार श्राद्धकर्मकी विशेष महत्ता है। इसके
बिनाजीवकी सद् गति नहीं होती। यद्यपि यह संस्कार पुत्रके द्वारा सम्पादित होता
है, किन्तु आजके अनास्थाके वातावरणमें पले हुए कुछ पुत्र-पौत्र अपने माता-पिताके
मरणोत्तर कर्मको सही ढंगसे सम्पादित नहीं करते हैं। जो पुत्रवान् नहीं हैं, उनकी तो बातही अलग है। प्रस्तुत
पुस्तकमें जीवित श्राद्धकी शास्त्रीय व्यवस्था दी गयी है, जिसके माध्यमसे
व्यक्ति अपने जीवित रहते ही मरणोत्तर क्रिया का सही सम्पादन करके कर्म-बन्धनसे
मुक्त हो सके।
Additional information
| Language | Hindi |
|---|---|
| Writer | Gita Press Gorakhpur |





