Garunpuranank (Gujarati)

230.00

संक्षिप्त
गरुडपुराण ग्रन्थाकार—इस पुराणके अधिष्ठ ातृ देव भगवान् विष्णु हैं। इसमें
ज्ञान, भक्ति, वैराग्य, सदाचार, निष्काम कर्मकी महिमाके साथ यज्ञ, दान, तप,
तीर्थ आदि शुभ कर्मोंमें सर्व साधारणको प्रवृत्त करनेके लिये अनेक लौकिक एवं
पारलौकिक फलोंका वर्णन किया गया है। इसके अतिरिक्त इसमें आयुर्वेद, नीतिसार आदि
विषयोंका वर्णन और जीवात्माके कल्याणके लिये मृत जीवके अन्तिम समयमें किये
जानेवाले कर्मोंका विस्तारसे निरूपण किया गया है।

Language

Gujarati

Writer

Gita Press Gorakhpur

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SKU: 1981 Category:

संक्षिप्त
गरुडपुराण ग्रन्थाकार—इस पुराणके अधिष्ठ ातृ देव भगवान् विष्णु हैं। इसमें
ज्ञान, भक्ति, वैराग्य, सदाचार, निष्काम कर्मकी महिमाके साथ यज्ञ, दान, तप,
तीर्थ आदि शुभ कर्मोंमें सर्व साधारणको प्रवृत्त करनेके लिये अनेक लौकिक एवं
पारलौकिक फलोंका वर्णन किया गया है। इसके अतिरिक्त इसमें आयुर्वेद, नीतिसार आदि
विषयोंका वर्णन और जीवात्माके कल्याणके लिये मृत जीवके अन्तिम समयमें किये
जानेवाले कर्मोंका विस्तारसे निरूपण किया गया है।

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Gujarati

Writer

Gita Press Gorakhpur