Durga Saptshati Mool Mota (Sanskrit)
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दुर्गासप्तशती
हिन्दू-धर्मका सर्वमान्य ग्रन्थ है। इसमें भगवतीकी कृपाके सुन्दर इतिहासके साथ
अनेक गूढ़ रहस्य भरे हैं। सकाम भक्त इस ग्रन्थका श्रद्धापूर्वक पाठकरके
कामनासिद्धि तथा निष्काम भक्त दुर्लभमोक्ष प्राप्त करते हैं। इस पुस्तकमें
पाठकरने की प्रामाणिक विधि, कवच, अर्गला, कीलक, वैदिक, तान्त्रिकरात्रिसूक्त,
देव्यथर्वशीर्ष, नवार्णविधि, मूलपाठ, दुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र,
श्रीदुर्गामानसपूजा, तीनोंरहस्य, क्षमा-प्रार्थनासिद्धि कुञ्जिका स्तोत्र, पाठके
विभिन्न प्रयोग तथा आरती दी गयी है।
| Language | Sanskrit |
|---|---|
| Writer | Gita Press Gorakhpur |
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दुर्गासप्तशती
हिन्दू-धर्मका सर्वमान्य ग्रन्थ है। इसमें भगवतीकी कृपाके सुन्दर इतिहासके साथ
अनेक गूढ़ रहस्य भरे हैं। सकाम भक्त इस ग्रन्थका श्रद्धापूर्वक पाठकरके
कामनासिद्धि तथा निष्काम भक्त दुर्लभमोक्ष प्राप्त करते हैं। इस पुस्तकमें
पाठकरने की प्रामाणिक विधि, कवच, अर्गला, कीलक, वैदिक, तान्त्रिकरात्रिसूक्त,
देव्यथर्वशीर्ष, नवार्णविधि, मूलपाठ, दुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्र,
श्रीदुर्गामानसपूजा, तीनोंरहस्य, क्षमा-प्रार्थनासिद्धि कुञ्जिका स्तोत्र, पाठके
विभिन्न प्रयोग तथा आरती दी गयी है।
Additional information
| Language | Sanskrit |
|---|---|
| Writer | Gita Press Gorakhpur |





