Bhakt Saptratna (Kannada)

12.00

भक्त सप्तरत्न पुस्तकाकार—भक्त चाहे किसी भी देश, काल, जातिमें
उत्पन्न क्यों न हो, भगवद्भक्तिके प्रभावसे वह सर्वपूज्य संत बन जाता है। इस
भक्तचरितमालामें ऐसे ही प्रेमी भक्त दामाजी पंत, रघु केवट, कूबा कुम्हार, यवन
भक्त सालबेग आदिके सुन्दर चरित्र पिरोये हुए हैं।

Language

Kannada

Writer

Gita Press Gorakhpur

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भक्त सप्तरत्न पुस्तकाकार—भक्त चाहे किसी भी देश, काल, जातिमें
उत्पन्न क्यों न हो, भगवद्भक्तिके प्रभावसे वह सर्वपूज्य संत बन जाता है। इस
भक्तचरितमालामें ऐसे ही प्रेमी भक्त दामाजी पंत, रघु केवट, कूबा कुम्हार, यवन
भक्त सालबेग आदिके सुन्दर चरित्र पिरोये हुए हैं।

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Gita Press Gorakhpur