Bhajanamrita (Hindi)
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भक्तोंके
लिये भजनों का महत्त्व अमृत-तुल्य है। भगवत्प्रेममें उन्मत्त प्रेमी का मन अनेक
प्रकारके भाव-तरंगोंसे अनुप्राणित होकर भजन बन जाता है। प्रस्तुत पुस्तकमें
इन्हीं भावतरंगों की सहज माधुरीको समेटकर ६७ मधुर भजनोंका यह संग्रह निवेदन,
भगवद्-वियोग, लीला गान आदि शीर्ष कों में प्रकाशित किया गया है।
| Language | Hindi |
|---|---|
| Writer | Gita Press Gorakhpur |
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भक्तोंके
लिये भजनों का महत्त्व अमृत-तुल्य है। भगवत्प्रेममें उन्मत्त प्रेमी का मन अनेक
प्रकारके भाव-तरंगोंसे अनुप्राणित होकर भजन बन जाता है। प्रस्तुत पुस्तकमें
इन्हीं भावतरंगों की सहज माधुरीको समेटकर ६७ मधुर भजनोंका यह संग्रह निवेदन,
भगवद्-वियोग, लीला गान आदि शीर्ष कों में प्रकाशित किया गया है।
Additional information
| Language | Hindi |
|---|---|
| Writer | Gita Press Gorakhpur |





