Bhagavatratna – Prahlada (Hindi)

45.00

भागवतरत्न प्रह्लïाद पुस्तकाकार—भगवान्ïके भक्तोंमें भक्त प्रह्लïादका चरित्र अद्वितीय है। भगवद्विश्वासका ऐसा अनूठा चरित्र कहीं ढूढऩेसे भी नहीं मिलता। इनकी रक्षाके लिये भगवान्ïको खम्भेसे प्रकट होना पड़ा। प्रस्तुत पुस्तकमें श्रीमद्भागवतके आधारपर श्रीप्रह्लïादजीके जीवन-चरित्रका बड़ा ही सुन्दर वर्णन किया गया है। इसमें हिरण्यकशिपुकी तपस्या, इन्द्रद्वारा प्रह्लïादकी माता कयाधूका अपहरण, देवॢष नारदद्वारा कयाधूको छुड़ाना, प्रह्लïादजीका जन्म, हिरण्यकशिपुका अत्याचार, हिरण्यकशिपु-वध इत्यादि सभी विषयोंपर बड़ा ही सरस विवेचन प्रस्तुत किया गया है।

Language

Hindi

Writer

Gita Press Gorakhpur

भागवतरत्न प्रह्लïाद पुस्तकाकार—भगवान्ïके भक्तोंमें भक्त प्रह्लïादका चरित्र अद्वितीय है। भगवद्विश्वासका ऐसा अनूठा चरित्र कहीं ढूढऩेसे भी नहीं मिलता। इनकी रक्षाके लिये भगवान्ïको खम्भेसे प्रकट होना पड़ा। प्रस्तुत पुस्तकमें श्रीमद्भागवतके आधारपर श्रीप्रह्लïादजीके जीवन-चरित्रका बड़ा ही सुन्दर वर्णन किया गया है। इसमें हिरण्यकशिपुकी तपस्या, इन्द्रद्वारा प्रह्लïादकी माता कयाधूका अपहरण, देवॢष नारदद्वारा कयाधूको छुड़ाना, प्रह्लïादजीका जन्म, हिरण्यकशिपुका अत्याचार, हिरण्यकशिपु-वध इत्यादि सभी विषयोंपर बड़ा ही सरस विवेचन प्रस्तुत किया गया है।

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Gita Press Gorakhpur

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