Anandmay Jivan (Nepali)

25.00

मनुष्य अपने – आपमें एक दैवीशक्ति-सम्पन्न आत्मा है। उसके कण-कणमें
आनन्दका दिव्य प्रवाह है। डॉ० रामचरण महेन्द्रके ओजस्वी विचारोंके रूप में
संकलित यह पुस्तक आध्यात्मिक पथकी परिचायिका तथा मानव-जीवनमें आनन्दमय वातावरण
को विकसित करने वाली है।

Language

Nepali

Writer

Gita Press Gorakhpur

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मनुष्य अपने - आपमें एक दैवीशक्ति-सम्पन्न आत्मा है। उसके कण-कणमें
आनन्दका दिव्य प्रवाह है। डॉ० रामचरण महेन्द्रके ओजस्वी विचारोंके रूप में
संकलित यह पुस्तक आध्यात्मिक पथकी परिचायिका तथा मानव-जीवनमें आनन्दमय वातावरण
को विकसित करने वाली है।

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Gita Press Gorakhpur