Mahatmaon ke Ahetu ke Daya

15.00

महात्माओंकी
अहैतुकी दया—भगवान्  और महात्माओंका
स्वभाव जीवमात्रपर सहज करुणा करना है। अत: भगवान्  अहैतुकी कृपा करके मानव-शरीर प्रदान करते हैं
और महात्मा जीवोंके परम विश्रामस्थान परमात्माको प्राप्त करनेका मार्ग बताते
हैं। ब्रह्मलीन परम श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दकाके पुराने प्रवचनोंसे संकलित
इस नवीन पुस्तकमें साधनको मूल्यवान् 
समझें, आत्मा नित्य है, शरीर अनित्य है, भेद भक्ति और अभेद मुक्ति आदि
विविध विषयोंके माध्यमसे भगवद् भक्तिकी प्रेरणा दी गयी है।

Language

Hindi

Writer

Shri Jayadayal Ji Goyendka

Out of stock

महात्माओंकी
अहैतुकी दया—भगवान्  और महात्माओंका
स्वभाव जीवमात्रपर सहज करुणा करना है। अत: भगवान्  अहैतुकी कृपा करके मानव-शरीर प्रदान करते हैं
और महात्मा जीवोंके परम विश्रामस्थान परमात्माको प्राप्त करनेका मार्ग बताते
हैं। ब्रह्मलीन परम श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दकाके पुराने प्रवचनोंसे संकलित
इस नवीन पुस्तकमें साधनको मूल्यवान् 
समझें, आत्मा नित्य है, शरीर अनित्य है, भेद भक्ति और अभेद मुक्ति आदि
विविध विषयोंके माध्यमसे भगवद् भक्तिकी प्रेरणा दी गयी है।

Additional information

Language

Hindi

Writer

Shri Jayadayal Ji Goyendka