Munshya Jeevan ka uddashya (Marathi)

15.00

मनुष्य-जीवनका उद्देश्य पुस्तकाकार—ब्रह्मलीन परम श्रद्धेय
श्रीजयदयालजी गोयन्दकाके पुराने प्रवचनोंसे संकलित इस पुस्तकमें नि:स्वार्थ
सेवा, भगवान् के स्वरूपका ध्यान, विषयोंकी तुच्छता आदि विभिन्न प्रकरणोंके
माध्यमसे परमार्थपथकी सुन्दर व्याख्या की गयी है।

Language

Marathi

Writer

Shri Jayadayal Ji Goyendka

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मनुष्य-जीवनका उद्देश्य पुस्तकाकार—ब्रह्मलीन परम श्रद्धेय
श्रीजयदयालजी गोयन्दकाके पुराने प्रवचनोंसे संकलित इस पुस्तकमें नि:स्वार्थ
सेवा, भगवान् के स्वरूपका ध्यान, विषयोंकी तुच्छता आदि विभिन्न प्रकरणोंके
माध्यमसे परमार्थपथकी सुन्दर व्याख्या की गयी है।

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Marathi

Writer

Shri Jayadayal Ji Goyendka