Sandhya Gayatri Ka Mahattva
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ब्रह्मचर्य-पालनके साथ सन्ध्योपासना एवं गायत्री-उपासनाकी शास्त्रोंमें बड़ी महिमा
बतायी गयी है। गायत्री-उपासना पर ब्रह्म की उपासना है। इसकी नित्यउपासनासे लौकिक
अभ्युदयके साथ सहजही आत्म कल्याणकी प्राप्तिहो सकती है। प्रस्तुत पुस्तकमें
ब्रह्मलीन परमश्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दकाके द्वारा प्रणीत ब्रह्म चर्य और
सन्ध्या-गायत्रीके महत्त्वके साथ सन्ध्योपासन विधिका प्रकाशन किया गया है।
सम्बन्धित विषयोंका एक साथ समावेश होनेके कारण यह पुस्तक सभीके लिये अत्यन्त
उपयोगी है।
| Language | Gujarati |
|---|---|
| Writer | Gita Press Gorakhpur |
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ब्रह्मचर्य-पालनके साथ सन्ध्योपासना एवं गायत्री-उपासनाकी शास्त्रोंमें बड़ी महिमा
बतायी गयी है। गायत्री-उपासना पर ब्रह्म की उपासना है। इसकी नित्यउपासनासे लौकिक
अभ्युदयके साथ सहजही आत्म कल्याणकी प्राप्तिहो सकती है। प्रस्तुत पुस्तकमें
ब्रह्मलीन परमश्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दकाके द्वारा प्रणीत ब्रह्म चर्य और
सन्ध्या-गायत्रीके महत्त्वके साथ सन्ध्योपासन विधिका प्रकाशन किया गया है।
सम्बन्धित विषयोंका एक साथ समावेश होनेके कारण यह पुस्तक सभीके लिये अत्यन्त
उपयोगी है।
Additional information
| Language | Gujarati |
|---|---|
| Writer | Gita Press Gorakhpur |





