यह
कवच देवॢषनारदके द्वारा प्रणीत तथा नारदपुराण से संगृहीत है। इसके पाठसे समस्त
विघ्नोंका नाश तथा आत्मसाक्षात्कार होता है।
Additional information
| Language | Marathi |
|---|---|
| Writer | Gita Press Gorakhpur |
यह
कवच देवॢषनारदके द्वारा प्रणीत तथा नारदपुराण से संगृहीत है। इसके पाठसे समस्त
विघ्नोंका नाश तथा आत्मसाक्षात्कार होता है।
| Language | Marathi |
|---|---|
| Writer | Gita Press Gorakhpur |