Desh Ki Vartaman Dasha Tatha Uska Parinam

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देशकी वर्तमान दशा तथा उसका परिणाम पुस्तकाकार—आसन्न विनाशकी तरफ
उन्मुख समाजकी पतनोन्मुखी धारणा—जिसमें पशुओंके विनाशको मांस उत्पादन;
मर्यादा-नाशको नारी स्वतन्त्रता, नैतिक-पतनको उन्नति तथा ‘भ्रूण-हत्या’ को पाप न
मानने-जैसी भ्रामक मान्यता हो गयी है। ब्रह्मलीन श्रद्धेय स्वामी
श्रीरामसुखदासजी महाराजने इस पुस्तकमें उस मान्यतापर कठोर प्रहार करते हुए
गृहस्थ-जीवनका सच्चा आदर्श प्रस्तुत किया है।

Language

Oriya

Writer

Swami Ramsukhdas Ji

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देशकी वर्तमान दशा तथा उसका परिणाम पुस्तकाकार—आसन्न विनाशकी तरफ
उन्मुख समाजकी पतनोन्मुखी धारणा—जिसमें पशुओंके विनाशको मांस उत्पादन;
मर्यादा-नाशको नारी स्वतन्त्रता, नैतिक-पतनको उन्नति तथा ‘भ्रूण-हत्या’ को पाप न
मानने-जैसी भ्रामक मान्यता हो गयी है। ब्रह्मलीन श्रद्धेय स्वामी
श्रीरामसुखदासजी महाराजने इस पुस्तकमें उस मान्यतापर कठोर प्रहार करते हुए
गृहस्थ-जीवनका सच्चा आदर्श प्रस्तुत किया है।

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Swami Ramsukhdas Ji