Goseva Ank (Hindi)

180.00

शास्त्रोंमें गौको सर्वदेवमयी और सर्व तीर्थमयी कहा गया है। गौके
दर्शन से समस्त देवताओंके दर्शन तथा समस्त तीर्थोंकी यात्राका पुण्य प्राप्त
होता है। इस विशेषाङ्क में गौ से सम्बन्धित अनेक आध्यात्मिक और तात्त्विक
निबन्धोंके साथ, गौका विश्वरूप, गोसेवाका स्वरूप, गोपालन एवं गो-संवर्धनकी मुख्य
विधाएँ तथा गो दान आदि उपयोगी विषयों का संग्रह हुआ है।

Language

Hindi

Writer

Gita Press Gorakhpur

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शास्त्रोंमें गौको सर्वदेवमयी और सर्व तीर्थमयी कहा गया है। गौके
दर्शन से समस्त देवताओंके दर्शन तथा समस्त तीर्थोंकी यात्राका पुण्य प्राप्त
होता है। इस विशेषाङ्क में गौ से सम्बन्धित अनेक आध्यात्मिक और तात्त्विक
निबन्धोंके साथ, गौका विश्वरूप, गोसेवाका स्वरूप, गोपालन एवं गो-संवर्धनकी मुख्य
विधाएँ तथा गो दान आदि उपयोगी विषयों का संग्रह हुआ है।

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Language

Hindi

Writer

Gita Press Gorakhpur