Gita-Ramanuja-Bhashya (Hindi)

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गीता-रामानुजभाष्य 
पुस्तकाकार—यह श्रीसम्प्रदाय-प्रवर्तक जगद्गुरु श्रीरामानुजाचार्यद्वारा
की गयी विशिष्टाद्वैत सिद्धान्तकी पुष्टिमें गीताकी अद्भुत व्याख्या है, जिसका
अनुकरण भक्ति-पक्षके लगभग सभी आचार्योंद्वारा किया गया है। आचार्यश्रीके इस
भाष्यमें प्रचलित अद्वैतवादका श्रुति-स्मृतियोंके प्रमाणसहित सुन्दर
युक्तियोंद्वारा खण्डन, भगवद्-आराधनापूर्वक कर्मकी आवश्यकतापर बल, आत्मबोधहेतु
सतत प्रयास इत्यादि विषयोंपर विशद विवेचन है। पुस्तकाकार—यह
श्रीसम्प्रदाय-प्रवर्तक जगद्गुरु श्रीरामानुजाचार्यद्वारा की गयी विशिष्टाद्वैत
सिद्धान्तकी पुष्टिमें गीताकी अद्भुत व्याख्या है, जिसका अनुकरण भक्ति-पक्षके
लगभग सभी आचार्योंद्वारा किया गया है। आचार्यश्रीके इस भाष्यमें प्रचलित
अद्वैतवादका श्रुति-स्मृतियोंके प्रमाणसहित सुन्दर युक्तियोंद्वारा खण्डन,
भगवद्-आराधनापूर्वक कर्मकी आवश्यकतापर बल, आत्मबोधहेतु सतत प्रयास इत्यादि
विषयोंपर विशद विवेचन है।

Language

Hindi

Writer

Gita Press Gorakhpur

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गीता-रामानुजभाष्य 
पुस्तकाकार—यह श्रीसम्प्रदाय-प्रवर्तक जगद्गुरु श्रीरामानुजाचार्यद्वारा
की गयी विशिष्टाद्वैत सिद्धान्तकी पुष्टिमें गीताकी अद्भुत व्याख्या है, जिसका
अनुकरण भक्ति-पक्षके लगभग सभी आचार्योंद्वारा किया गया है। आचार्यश्रीके इस
भाष्यमें प्रचलित अद्वैतवादका श्रुति-स्मृतियोंके प्रमाणसहित सुन्दर
युक्तियोंद्वारा खण्डन, भगवद्-आराधनापूर्वक कर्मकी आवश्यकतापर बल, आत्मबोधहेतु
सतत प्रयास इत्यादि विषयोंपर विशद विवेचन है। पुस्तकाकार—यह
श्रीसम्प्रदाय-प्रवर्तक जगद्गुरु श्रीरामानुजाचार्यद्वारा की गयी विशिष्टाद्वैत
सिद्धान्तकी पुष्टिमें गीताकी अद्भुत व्याख्या है, जिसका अनुकरण भक्ति-पक्षके
लगभग सभी आचार्योंद्वारा किया गया है। आचार्यश्रीके इस भाष्यमें प्रचलित
अद्वैतवादका श्रुति-स्मृतियोंके प्रमाणसहित सुन्दर युक्तियोंद्वारा खण्डन,
भगवद्-आराधनापूर्वक कर्मकी आवश्यकतापर बल, आत्मबोधहेतु सतत प्रयास इत्यादि
विषयोंपर विशद विवेचन है।

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Hindi

Writer

Gita Press Gorakhpur