Garg Sanhita (Hindi)
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गर्गसंहिता ग्रन्थाकार—यह ग्रन्थ यदुकुलके महान् आचार्य महामुनि
श्रीगर्गकी रचना है। इसमें श्रीमद्भागवतमें सूत्ररूपसे वॢणत श्रीराधाकृष्णकी
लीलाओंका विस्तृत वर्णन किया गया है। श्रीराधाजीके दिव्य आकर्षणसे आकॢषत भगवान्
श्रीकृष्णका रासरासेश्वरी श्रीराधा एवं गोपिकाओंके साथ रासलीलाका इतना सुन्दर और
सरस वर्णन अन्यत्र दुर्लभ है। पूर्वजन्ममें गोपिकाओंद्वारा श्रीकृष्ण-प्रेमकी
प्राप्तिके लिये की गयी तपस्या तथा उनकी सरस कथाओंका भी इसमें सुन्दर वर्णन किया
गया है। भगवान् श्रीकृष्णके अनुरागी भक्तोंके लिये यह दिव्य ग्रन्थ नित्य
स्वाध्यायका विषय है।
| Language | Hindi |
|---|---|
| Writer | Gita Press Gorakhpur |
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गर्गसंहिता ग्रन्थाकार—यह ग्रन्थ यदुकुलके महान् आचार्य महामुनि
श्रीगर्गकी रचना है। इसमें श्रीमद्भागवतमें सूत्ररूपसे वॢणत श्रीराधाकृष्णकी
लीलाओंका विस्तृत वर्णन किया गया है। श्रीराधाजीके दिव्य आकर्षणसे आकॢषत भगवान्
श्रीकृष्णका रासरासेश्वरी श्रीराधा एवं गोपिकाओंके साथ रासलीलाका इतना सुन्दर और
सरस वर्णन अन्यत्र दुर्लभ है। पूर्वजन्ममें गोपिकाओंद्वारा श्रीकृष्ण-प्रेमकी
प्राप्तिके लिये की गयी तपस्या तथा उनकी सरस कथाओंका भी इसमें सुन्दर वर्णन किया
गया है। भगवान् श्रीकृष्णके अनुरागी भक्तोंके लिये यह दिव्य ग्रन्थ नित्य
स्वाध्यायका विषय है।
Additional information
| Language | Hindi |
|---|---|
| Writer | Gita Press Gorakhpur |





