Gita Sudha Tarangini

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जीवन-कलाके संवाहक ब्रह्मलीन श्रद्धेय स्वामी
श्रीरामसुखदासजीद्वारा सरल-से-सरल शैलीमें प्रणीत इस ग्रन्थरत्नके स्वाध्यायसे
अनेक भावुक भक्त गीतारूपी दर्पणके द्वारा आत्मपरिष्कार कर चुके हैं। इसमें
गीताको सुबोध रूपमें प्रश्नोत्तर शैलीमें प्रस्तुत किया गया है तथा गीताको
विभिन्न दृष्टियोंसे विचारकी कसौटीपर कसते हुए प्रधान-प्रधान विषयोंको विशद
व्याख्यासे समलंकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त इसमें गीता-व्याकरण एवं
छन्द-सम्बन्धी ज्ञानसे भी परिचित कराया गया है।

Language

Hindi

Writer

Gita Press Gorakhpur

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जीवन-कलाके संवाहक ब्रह्मलीन श्रद्धेय स्वामी
श्रीरामसुखदासजीद्वारा सरल-से-सरल शैलीमें प्रणीत इस ग्रन्थरत्नके स्वाध्यायसे
अनेक भावुक भक्त गीतारूपी दर्पणके द्वारा आत्मपरिष्कार कर चुके हैं। इसमें
गीताको सुबोध रूपमें प्रश्नोत्तर शैलीमें प्रस्तुत किया गया है तथा गीताको
विभिन्न दृष्टियोंसे विचारकी कसौटीपर कसते हुए प्रधान-प्रधान विषयोंको विशद
व्याख्यासे समलंकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त इसमें गीता-व्याकरण एवं
छन्द-सम्बन्धी ज्ञानसे भी परिचित कराया गया है।

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Hindi

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Gita Press Gorakhpur