Manushya Ka Paramakartavya (Part I) (Hindi)

25.00

मनुष्यका परम कर्तव्य पुस्तकाकार— ब्रह्मलीन परम श्रद्धेय
श्रीजयदयालजी गोयन्दकाके द्वारा प्रणीत इ स पुस्तकमें भक्ति, ज्ञान, वैराग्य,
संयम, वर्णाश्रम-धर्म, सत्य, श्रद्धा, समता, भगवत्प्रेम, प्रारब्ध और पुरुषार्थ
आदि आध्यात्मिक विषयोंपर सुन्दर विवेचन किया गया है।

Language

Hindi

Writer

Shri Jayadayal Ji Goyendka

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मनुष्यका परम कर्तव्य पुस्तकाकार— ब्रह्मलीन परम श्रद्धेय
श्रीजयदयालजी गोयन्दकाके द्वारा प्रणीत इ स पुस्तकमें भक्ति, ज्ञान, वैराग्य,
संयम, वर्णाश्रम-धर्म, सत्य, श्रद्धा, समता, भगवत्प्रेम, प्रारब्ध और पुरुषार्थ
आदि आध्यात्मिक विषयोंपर सुन्दर विवेचन किया गया है।

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Language

Hindi

Writer

Shri Jayadayal Ji Goyendka