हनुमानबाहुक—
गोस्वामीजीके द्वारा विरचित यह स्तुत्यात्मक काव्य त्रिताप-निवारक तथा
श्रीहनुमान्जीकी प्रसन्नताहेतु सबल आधार है। इसके पाठसे आपत्तियोंका शमन एवं
हनुमान्जीकी कृपा प्राप्त होती है।
Additional information
| Language | Hindi |
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| Writer | Gita Press Gorakhpur |





