Patanjali Yoga Pradip (Hindi)

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पातञ्जलयोग-प्रदीप
ग्रन्थाकार—श्रद्धेय श्रीओमानन्द महाराजद्वारा प्रणीत इस ग्रन्थमें
पातञ्जलयोग-सूत्रोंकी व्याख्या तत्त्ववैशारदी, भोजवृत्ति तथा योगवाॢतकके अनुसार
विस्तृत रूपसे की गयी है। इसमें उपनिषदों तथा भारतीय दर्शनोंके विभिन्न
तत्त्वोंकी सुन्दर समालोचना है। इसकी व्याख्या सरल तथा सुगम है। भूमिकारूपमें
षड्दर्शन-समन्वय तथा तत्त्वविश्लेषण प्रणालीसे यह ग्रन्थ और भी उपयोगी हो गया
है। यह योगदर्शनके जिज्ञासुओंके लिये नित्य पठनीय है।

Language

Hindi

Writer

Gita Press Gorakhpur

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पातञ्जलयोग-प्रदीप
ग्रन्थाकार—श्रद्धेय श्रीओमानन्द महाराजद्वारा प्रणीत इस ग्रन्थमें
पातञ्जलयोग-सूत्रोंकी व्याख्या तत्त्ववैशारदी, भोजवृत्ति तथा योगवाॢतकके अनुसार
विस्तृत रूपसे की गयी है। इसमें उपनिषदों तथा भारतीय दर्शनोंके विभिन्न
तत्त्वोंकी सुन्दर समालोचना है। इसकी व्याख्या सरल तथा सुगम है। भूमिकारूपमें
षड्दर्शन-समन्वय तथा तत्त्वविश्लेषण प्रणालीसे यह ग्रन्थ और भी उपयोगी हो गया
है। यह योगदर्शनके जिज्ञासुओंके लिये नित्य पठनीय है।

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Writer

Gita Press Gorakhpur